Thursday, 3 January 2013

ख्वाहिशें

नए साल के ख़ुशी में कुछ गीत  लिखना चाहता हूँ
कुछ दिलों में अरमां हैं पूरा करना चाहता हूँ 


भुत में जो दिल रोया सवालों के जवाबो के लिए
  उन  सवालों का  जवाब पाना चाहता हूँ 


बहुत जिया रो रो  कर इस महफ़िल में
अब हंस हंस कर जीना चाहता हूँ 


बहुत देखा सपने बंद आँखों से
अब खुले आँखों से सपने देखना चाहता हूँ 


महफ़िल में बहुत रहा अकेला
अब अकेले में महफ़िल बनाना चाहता हूँ 


दिल में बहुत सुर  है साज के लिए
उन सुरों को संगीत बनाना चाहता हूँ 


अपनों ने बहुत रुलाया  मुझे
अब उनकों मै हँसाना चाहता हूँ 


कुछ   लिखने का मन किया बैठ गया लिखने
क्यूंकि सच्चे शब्दों में सच का अहसास लिखना चाहते हैं ............






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