Wednesday, 5 September 2012

दहशत



















हर पल मरता हूँ जीता हूँ

हर दिन गम पीता हूँ
मै तेरे काबिल नही था या तू 
यु ही बोला करती थी कि तू नही थी 
जब दूर गये तो सोचकर आँख भर आये
क्या कसूर था तेरा जो हम कर गये
नम निगाह देख के हमदर्दी ना जाता
ये तो मैं चश्म का भोझ गिरा आया हूँ
मैं वहां की घांस भी जला आया था
तेरे जाने के बाद भी तुझे छोड़ ना पाया हूँ
अब क्या पता मेरा खुशी के पल जाने कब आयेंगे
अब खुशी तभी आएगी जब हमेशा के लिय चले जाएँगे     


Anuj Singh