Sunday, 20 December 2009

बिहार की राजनीति


बिहार की राजनीती धीरे-धीरे गरम हो रही है. कारण है की अगले साल चुनाव होने वाले है. ये बात लालू और रामविलास अच्छी तरह से जानते है की अगर अभी से नितीश के खिलाफ कुछ नही किया गया तो हम आगे कुछ नही कर सकते. लेकिन एक बात समझ में नही आती ये राजनीती करने वाले लोग चाहते क्या है? केवल अपना हित या लोगो का हित. लालू और रामविलाश के तेवर देखने बाद यही लग रहा है की ये लोग अपना हित चाहते है क्योकि बिहार की जनता का हित तो नितीश बड़ी ईमानदारी से कर रहे है. लेकिन इनको ये बाद हजम नही हो रही है. लालू जो की १५ साल शासन किये लेकिन बिहार के बारे में नही सोचे अब जब की सत्ता से बाहर है तो उनको बिहार का विकास की बात याद आई. मानना पड़ेगा लालू जी आप सही में मैनेजमेंट गुरु है. लेकिन शायद आपको पता नही की ये बिहार की जनता है जो आपको पहचान गयी है. आपके खाने के कुछ और दात है और दिखाने के कुछ और. अब बात अगर रामविलास की जाये तो ये भी बस सत्ता के पुजारी है. जब बिहार कि जनता ने इनको मौका दिया तो इनको लगा की बस अब हम सुप्रीम बन गये है. बिहार पर दुबारा चुनाव का भार दिया. अब कभी दलित एजेंडा तो कभी मुस्लिम का एजेंडा लेकर घूम रहे है. इनको ये पता नही की अब बिहार में ये सब मुद्दा नही चलेगा अब केवल विकास का ही रथ चलेगा. जो उसको चलाएगा वही बिहार राष्ट्र पर शासन करेगा. वो चाहे नितीश हो या लालू हो या फिर रामविलाश. नितीश की बात की जाये तो जो कम लालू ने १५ साल में नहीं किया वो ४ साल में किये. नितीश कुमार की जितनी तारीफ की जाये वो कम है. हा कुछ मामले मी नितीश की सरकार से चुक हुई है लेकिन हम को इंतजार  करना चाहिए. बेरोजगारी और किसान के हितो को नितीश को गंभीरता से लेना चाहिए. इस पर अभी बहुत काम करना होगा. लेकिन नितीश के पास कोई जादू की छड़ी नही है जो एक बार घुमाया और सब काम हो गया. ५ साल में वे २० साल का काम किये है. लालू ने १५ साल बिहार को जो पीछे धकेल दिया था वो अभी नितीश ने उसे बराबर किया है. इसीलिय नितीश सरकार ने जो काम किया है उसके लिय वाकई तारीफ के काबिल है. अभी अगर बिहार में जो शासन करने लायक है वो केवल नितीश की सरकार ही है. बाकि केवल अपन राजनीती की रोटी सेंक रहे है. ऐसे लोगो से बिहार की जनता को सावधान रहना चाहिए. मै व्यक्तिगत रूप से बिहार की जनता से कहाँ चाहूँगा आप जाति, संप्रदाय, और वर्ग की राजनीति से बचे. ये लोग किसी का हित नही करेंगे बस केवल अपने मौके की तलाश में है जो इस तरह के मुद्दे उठाकर सत्ता में आना चाहते है . आप लोग समझे और ऐसे लोगो से बचे वरना ??????????????
जय हिंद जय भारत
अनुज सिंह

Tuesday, 10 November 2009

एक और खालिस्तान

जिस तरह से मनसे महाराष्ट्र में कार्य कर रही है कुछ ऐसे ही पंजाब में खालिस्तान को लेकर शुरुआत हुआ था। जो काम भिन्दरवाले ने पंजाब में किया था वही काम महारष्ट्र में राज ठाकरे कर रहा है। और उस समय भी कांग्रेस इसी तरह चुप थी और आज भी चुप है। उस समय भी कांग्रेस की सरकार केन्द्र में थी और आज भी है। अभी समय है की हम पिछली गलती से सबक ले और ऐसे असामाजिक और देश की एकता और अखंडता को चोट करने वाले लोगो को कड़ी से कड़ी सजा दे। आज वे हिन्दी में शपथ को लेकर बवाल कर रहे है कल वे बोलेंगे की सब काम मराठी भाषा में होनी चाहिए। क्या ये संभव है ? ये बात हमारे और राजनितिक दलोंको क्यो समझ में नही आ रहा है ? क्या अब इतनी गिरी हुई राजनीती हो गयी की कुछ संकीर्ण लोगो के लिय देश की एकता और अखंडता को दव पर लगा दे। ये बात कब समझ में आएगी। जो हमारे देश की आर्थिक राजधानी है वहा पर अगर इस तरह से अलगाववादी लोग पनपे तो फ़िर कौन वहा पर इन्वेस्ट करेगा। ये केवल हमारे एक मुबई और महाराष्ट्र की बात नही बल्कि पुरा भारत के लिय प्रॉब्लम पैदा हो रही है। ये मराठी लोगो के लिय भी सही नही है। अगर बाहर से कोई इन्वेस्ट नही करेगा तो क्या राज ठाकरे घर से पैसा लगायेंगे या फ़िर हफ्ता लेकर फैक्ट्री लगायेंगे। अभी तक मनसे की कार्यवाही से कम से कम २२००-५५०० करोड़ का नुकसान हो गया है। इसका कही ना कही मराठी लोगो के आय पर भी तो प्रभाव पड़ा ही होगा। ये लोग बोलते है की हम मराठो के शुभचिंतक है। ये मुबई को कितना नुकसान पंहुचा रहे है ये तो वहा के लोगो को भी पता नही। कितना बड़ा मजाक हमारे देश के साथ हो रहा है ये अभी समझ में नही आ रहा है लेकिन आगे अगर इसी तरह चला तो वो दिन दूर नही जब फ़िर एक ब्लू स्टार करना पड़े। इसके लिय कही न कही कांग्रेस की तुस्टीकरण की निति जिमेद्दार है। अभी समय है इन लोगो को कड़ी से कड़ी सजा देकर इस तरह की गतिविदी को रोक सकते है वरना ?????????????????
जय हिंद जय भारत
अनुज राठौर

Saturday, 22 August 2009

जीवन

एक बात तो तय है जीवन में कुछ पाना है तो कुछ खोना पड़ेगा। लेकिन किस चीज की क्या कीमत होगी ये आप नही तय कर सकते । ये पात्र और परिस्थति पर निर्भर है । अब सवाल ये है की हम समझे कैसे की हम फायदे में है या नुकसान में । यही गुण सबमे नही होता । जो इस चीज को समझ गया उसकी तो बस निकल पड़ी । हमारे जीवन में भी बहुत उतर-चदाव आते रहते है । लेकिन बुदिमान वही है जो इस चीज से सबक ले । अब ये सबक वाली बात हो सकता है बहुत लोगो को समझ में न आए लेकिन समझना तो पड़ेगा । क्योकि अगर आगे बढ़ना है तो फ़िर इतना तो समझने के लिय तैयार रहना ही पड़ेगा । कभी हम खुश होते है तो लगता है की पुरा जंहा अपना है । जीवन बहुत प्यारी लगती है लेकिन अगर थोड़ा परेशान होते है तो बस वही जीवन को लेकर परेशानी । मै जो लिख रहा हु इसका लिखने का केवल एक ही मकसद है आप परेशानी से भागे नही बल्कि उसी में आप अपना लक्ष्य खोजे । हो सकता है उसी समस्या में भगवान ने आपको कोई नया खुशी भेजा हो। पहले आप उस समस्या को समझनेकी कोसिस तो कीजिये। मै बहुत लोगो को देखा हु की थोडी सी कोई समस्या हुआ की बस आपने आप को हारा हुआ मानकर बैठ जाते है। मेरे दोस्तों ये कमजोर लोगो की पहचान है । हम तब तक लडेंगे जब तक मंजिल नही पा लेते । मै भी मंजिल पाने की कोसिस कर रहा हूँ । अगर बिच में ही हार मन गए तो साहिल पर कौन जाएगा । डरना मत यदि डर गये तो मर गये । यदि जीत गए तो सारी दुनिया अपनी वरना ????????

Sunday, 12 July 2009

जे. न. यु. में ऍम. फिल

बहुत ही टफ काम है। एक तो परेशान आदमी अपने मीडियम से रहता है ऊपर से गुरूजी का तेवर । बड़ी समस्या है। मै किसी व्यक्तिगत रूप से किसी टीचर को नही बोल रहा हु। लेकिन जितनी भी मेरे बैचमेट है सभी परेशान है। और होना भी चाहिए आख़िर आप जेनयु से एमफिल कर रहे है तो इतना तो परेशान होना हो पड़ेगा। मेरे हिसाब से समस्या ये नही है की हम कहा से आए है बल्कि समस्या इस जेनयु काहै जो इस तरह का माहौल दे देता है की हमलोग भू लजाते है की एमफिल भी करने आए है। अब एक दोस्त है मेरे जो की बहुत करीब है। मै नाम नही लूँगा वरना हो सकता है वो मानहानि की दावा भी कर दे। वो बेचारे पुरे तिन महिना आनंद लिय जेनयु के वातावरण का । अब जबकि १५ दिन बचा तब याद आया की मुझे कुछ काम भी है। अब इसमे आप बताये की किसका दोष है ? टीचर का या स्टुडेंट का या फ़िर जेनयु का। मुझे आज तक ये बात समझ में नही आई की लोग हर गलती का कोई न कोई बहाना क्यो निकल ही लेते है। वो ऐसा था इसलिय मै नही कर पाया। इस तरह के लोगो को हर काम दुसरे के सिरपर रख कर बचाना चाहते है। लेकिन इसका अंत क्या है ? उनको ख़ुद नही पता। मै ये सब लिख रहा हु इसका मतलब ये नही की मै ख़ुद इस समस्या से निजात पा लिया हु। लेकिन प्रयास जारी है। कब तक चलेगा ये कोई नही जनता। बहरहाल जेनयुका सुख तो कही नही मिलेगा भइया। ये मायावी नगरी है। इससे जो बच गया समझो वो कुछ कर गया। वरना ???????????????
अनुज सिंह

जे. न. यु.

Wednesday, 8 July 2009

नया समस्या

आज भले हम कहे की हम आजाद भारत में रह रहे है, लेकिन ये केवल कहने के लिए है बल्कि आज हम अग्रेंज के समय से भी ख़राब परिस्तिथि में जीवन यापन कर रहे है। सवाल यह है की हम कितने आजाद है ? इस गाँधी और नेहरू के देश में क्या वो सभी चीजे मिल रही है जो की इन लोगो ने सपना देखा था। इसका जवाब मिलेगा नही। आज हम न्यूज़ पेपर पढ़ रहे थे तो उसमे एक फ़र्जी मुठभेड़ की ख़बर मिली जो एक एमबीऐ का लड़का था। क्या इसी तरह के भारत के लिय हमारे शहीदों ने अपना प्राण न्योछावर किया? बहुत सवाल मन में आ रहा है लेकिन कौन जवाब देगा ? आज के हमारे नेता जो केवल पैसा और समाज में अपनी स्तिथि को बनाने में लगे है। शर्म आती है इनको आपना नेता कहते हुए भी। कभी समय था की भय, भूख और भ्रष्टाचार पर चुनाव लड़ा जाता था लेकिन आज तो केवल हमारे नेता जी पैसा के लिय चुनाव लड़ते है या अपना कोई मुकदमा बंद करवाना हो तब। ऐसे देश का भला क्या होगा जहा राजा ही चोर हो। ऐसे में अगर एक फ़र्जी मुठभेड़ हो रहा है तो कोई नही बात नही है। ऐसे तो होता ही रहेगा जब तक की ऐसे लोग है।
बात केवल एक फ़र्जी मुठभेड़ की नही है। हर तरफ़ भ्रष्टाचारी है। कहा-कहा बचेंगे कही न कही तो आपको भी टकराना ही पड़ेगा तो सोएये मत और आपनी बारी का इंतजार मत करे नही तो उस समय आपका साथ देने वाला कोई नही मिलेगा। जितने भी गंदे लोग है उनको निकलने लिय हम प्रण ले। नही तो बाद में बहुत लेट हो जाएगा। जागिये और बचा लीजिय अपने भारत माँ को।
जय हिंद जय भारत ..........अनुज..

.....asking Anuj Singh

hii i am asking to everybody.. who is responsible for curraption in public sector ? government or public . everyman face this problem but nobody can cry against this type problem. now question rise Why ? We are not aware or we are habitual. as far as i know, we have been known this is part of work. So we would be paid.
its not good sign for our Indian society and culture. what we can do ? we cant do any work without money. its so bad....
how is solve this problem........asking.........