ये बात बड़ी ही सोचनीय है की हम अपना किसको कहते है ? जो हमारे हित के बारे में सोचता है उसको या फिर जो हमारा अहित करता है उसको.. अब तो बड़ा कठिन और जटिल प्रश्न हो गया है . फिर भी इस बारे में मंथन तो करना ही चाहिए. लेकिन फायदा क्या होगा हमारे लिखने से. अगर मै इस बारे में कुछ लिख भी दू तो क्या मेरी परिभाषा सर्वमान्य होगी ? कभी नही क्योकि हमसे भी बड़े- बड़े लोग इसको अच्छे तरह से परिभाषित कर चुके है. तो फिर मेरी विसात क्या की मै गलत ठहरा दूँ ! भाई जो भी हो अब ये जो बुदिमान लोग है इनके ऊपर दया आ रही है. आखिर किस शब्दकोष में ये अपना-पराया का परिभाषा पढ़े है. जो रोज किसी न किसी बहाने अपनों का खून बहते है उसे बोलते है ये लोग अपना है. अरे एक माँ को भी जब लगता है की मेरा बेटा किसी गलत काम में लग गया है तो उसे बेटा मानने से इंकार कर देती है जो की नौ महीने तक अपने कोख में पलती है. और ये तो वैसे भी किसी माँ के बेटे नही है.. क्योकि कोई माँ अपने बेटे को ये नही कह सकती जाओ और किसी निर्दोष लोगो को मारो.. ये लोग गरीब लोगो की दुहाई देते है ..अरे मै पूछता हु की जो सिपाही है, जो सैनिक है क्या वो किसी उधोगपति या किसी नेता के बेटे होते है . वो भी किसी गरीब के ही बेटे होते है.. आसे लोगो को अपना कह रहे है... शर्म आनी चाहिए जो इनकी कामो की वकालत करते है. हमें तो ऐसे लोगो को भारतीय होने पर भी शक है. जो लाखो भारतीयों को मार चुके हो उनको ये लोग अपना कहते है. आये दिन ये कुछ न कुछ नष्ट कर रहे है और ये अपना कह रहे है.. सरकार काम कर रही है लेकिन ये काम होने नही दे रहे है.. फिर भी ये अपने है.. विधालय को नष्ट कर दे रहे है फिर भी ये अपने है. वाह रे अपने....
अब सवाल ये है की पराये कौन है...आंतकवादी पराये है.. लेकिन किस आधार आप इनको पराया कह रहे है भाई.. सबके लिय बराबर मानक होना चाहिए..ये भी वही काम करते है जो आपके अपने करते है फिर ये पराये क्यों ? इनको भी वही इज्जत मिलनी चाहिए जो आपके आपनो को मिल रही है.. आखिर ये लोग भी तो अपने देश की ही लोग है...हाय रे विधाता तरस आती इनके विढ़ता पर जो अपने थोड़े से हित के लिय पुरे समाज को नष्ट कने पर तुले हुए है..
अभी भी समय है आप संभल जाओ वरना...........
जय हिंद जय भारत अनुज राठोर