Wednesday, 6 July 2011

तुझको भी याद आऊँ न मैं

ये चाहती है हवा उसको आजमाऊँ न मैं
कोई चिराग़ कहीं भी कभी जलाऊँ न मैं

सुकूत साया रहे इस ज़मीन पर हरदम
कोई सदा कोई फ़रियात लब पे लाऊँ न मैं

यूँ ही भटकता रहूँ उम्र भर उदास-उदास
सुराग़ बिछड़े हुओं का कहीं भी पाऊँ न मैं

सफ़र ये मेरा किसी तौर मुख़्तसर१ हो जाए
वो मोड़ आये कि जी चाहे आगे जाऊँ न मैं

भुला तो दूँ तेरे कहने पे तुझको दिल से मैं
मगर ये शर्त है, तुझको भी याद आऊँ न मैं

Thursday, 30 June 2011

ग़मों की परछाइयाँ

कभी नही छोड़ेंगे तेरा दामन तू कितना भी जोर लगा ले
जो खुदा ने भेजा है मुझे तेरे लिए ....
तू कहाँ है अभी तक...
सो रहा है या स्वप्न देख रहा है
जग देख सुबह हो चुकी है
कब तक स्वप्न में रहेगा 
जागेगा तो मै तेरे साथ रहूँगा 
तेरे तक़दीर की तस्वीर हूँ मै
मत हँस, क्योंकि लोग तुझे ढोंगी बोलेंगे 
आखिर कब तक ढोंग करेगा 
मुझे पता है तुम अँधेरे से डरते हो
और उजालों में मै तेरे साथ हूँ 
तुम किसी दरीचे से भाग
तेरे हर सफहों पे मेरा नाम है
तेरे जिन्दगी की किताब है तन्हा
जरा धीरे पढ़ 
क्योकि कुछ अनपढ़े सफहों की 
बड़ी आफत होती है..
चल जग अब बहुत हो चूका.
सिख ले मेरे साथ जीना..??????
ग़मों की परछाइयाँ