
हर पल मरता हूँ जीता हूँ
हर दिन गम पीता हूँ
मै तेरे काबिल नही था या तू
यु ही बोला करती थी कि तू नही थी
जब दूर गये तो सोचकर आँख भर आये
क्या कसूर था तेरा जो हम कर गये
नम निगाह देख के हमदर्दी ना जाता
ये तो मैं चश्म का भोझ गिरा आया हूँ
मैं वहां की घांस भी जला आया था
तेरे जाने के बाद भी तुझे छोड़ ना पाया हूँ
अब क्या पता मेरा खुशी के पल जाने कब आयेंगे
अब खुशी तभी आएगी जब हमेशा के लिय चले जाएँगे
Anuj Singh