Wednesday, 10 February 2010

ये है मुंबई मेरी जान

जय बाल ठाकरे जय महाराष्ट्रा ! अब अगर महाराष्ट्रा में रहना है तो यही कहना है. कभी मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी कही जाती थी ( अभी भी है ) लेकिन अब तो शिव सेना और मनसे का राजनीति का अखाडा बना हुआ है. वहा से भारत का कोई नाता नही है. वहा पर कानून भी बाउरा (बाल ठाकरे, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ) का चलता है. अगर कोई मैच करना हो तो शिव सेना से परमिशन लिजिय, अगर कोई मूवी का रिलीज सही ढंग से चाहते हो तो बाउरा से मिलिए. यानि मुंबई में कुछ भी करना हो तो बाउरा से मिलिए. ये है क्या ? बाउरा की दादागिरी. जी हा आप अगर मुंबई में जाना चाहते हो तो पहले इन साहब से मिल कर अपना वीजा बनवा लीजिये नही तो हो सकता है की आपको मुंबई से निकाल दिए जाये. और यही वहा की लोकतंत्र है. इसमें मराठा भाई का कोई कसूर नही है. कसूर तो यु. पि. और बिहार के लोगो का भी नहीं है. हमारे बाउरा साहब का भी नही है. सभी अपना हित चाहते है वो भी अपना हित चाह रहे है. तो सवाल है की कसूर किसका है ? ये सब कसूर उस मुंबई का है. जो सदियों पहले भारत की आर्थिक राजधानी बन गयी . अब आर्थिक राजधानी तो पुरे देश की है तो अर्थ के लिय तो लोग जायेंगे ही. इसमे कसूर तो किसी का नही है भाई. अब सवाल है की मुंबई अगर भारत का है तो भारत को कुछ करना चाहिए लेकिन भारत भी तो अपना हित देख रहा है. उसे भी तो बाउरा जैसे अपने हित की पूर्ति करनी है. करे भी क्यों नही आखिर ऐसे मौके बार बार तो आते नहीं जब दो दुश्मन आपस में ही लड़ रहे हो तो क्या जरूरत है बिच में पड़ने की.
       हाय रे भारत तरस आती है ऐसी घिनौनी राजनीति पर. अगर भारत के प्रतिनिधि राहुल गाँधी को जाना हो तो कानून ऐसे हो जाती है जैसे पूरा मुंबई कर्फुयु जैसा माहौल और वही आम आदमी के लिय कानून सोते रहता है. जब कोई परीक्षा होती है तो वहा की सरकार को पता रहता है की बाहर से लोग आयेंगे तब इन बाउरा के गुंडों को रोकने के लिय कोई पुलिस नही, कोई फ़ोर्स नहीं सब सो रहे होते है लेकिन कोई कोंग्रेस का नेता जाता है तो सब कुछ सही हो जाता है. शाहरुख़, अमिताभ, सचिन, ये सब जब धमकाए गये तो कानून सुधार की कोई जरूरत नही समझी गयी लेकिन अपने नेता को धमकाया गया तो वहा के C M ने केंद्र सरकार से तुरंत कानून सुधार की बात कहने लगे.
आखिर ये कब तक चलते रहेगा. जब वो सत्ता में रहे तो इनको निशाना बनाया जब ये सत्ता में है तो उनको निशाना बनाया. लेकिन आम जनता तो हमेशा निशाना बनती है. चाहे वो हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर या उत्तर भारत-दखिन भारत के नाम पर या सवर्ण-दलित के नाम पर. इस तरह की राजनीति करने वाले लोग कब तक इस देश को कमजोर करते रहेंगे.
इन लोगो का बस एक ही हस्र होना चाहिए......... इनको फाँसी होनी चाहिए. जब एक आतंकवादी को फाँसी हो सकती है तो इनको क्यों नही. जो काम आतंकवादी कर रहे है वही काम तो ये लोग भी कर रहे है. . आतंकवादी से भी जायदा खतरनाक है ये लोग !  कम से कम आतंकवादी को हम समझ सकते है, पहचान सकते है लेकिन इनको तो पहचान भी नही सकते. ये तो घर अन्दर बैठ कर हम लोगो से ही अपने लोगो का खून करवारते है. और हम करते भी है. हमको पता भी नही चलता है. हम इतने भावनाओ में बह जाते है की अपना पराया भी समझ में नही आता. तो सबसे पहले इनसे निपटना होगा नही तो हम आपस में लड़ेंगे ये लोग शान से बैठ कर तमाशा देखेगे. आप सभी लोग इस चीज को समझ जाओ वरना ?????????????????????????  
जय हिंद जय भारत
अनुज राठौर