आज भले हम कहे की हम आजाद भारत में रह रहे है, लेकिन ये केवल कहने के लिए है बल्कि आज हम अग्रेंज के समय से भी ख़राब परिस्तिथि में जीवन यापन कर रहे है। सवाल यह है की हम कितने आजाद है ? इस गाँधी और नेहरू के देश में क्या वो सभी चीजे मिल रही है जो की इन लोगो ने सपना देखा था। इसका जवाब मिलेगा नही। आज हम न्यूज़ पेपर पढ़ रहे थे तो उसमे एक फ़र्जी मुठभेड़ की ख़बर मिली जो एक एमबीऐ का लड़का था। क्या इसी तरह के भारत के लिय हमारे शहीदों ने अपना प्राण न्योछावर किया? बहुत सवाल मन में आ रहा है लेकिन कौन जवाब देगा ? आज के हमारे नेता जो केवल पैसा और समाज में अपनी स्तिथि को बनाने में लगे है। शर्म आती है इनको आपना नेता कहते हुए भी। कभी समय था की भय, भूख और भ्रष्टाचार पर चुनाव लड़ा जाता था लेकिन आज तो केवल हमारे नेता जी पैसा के लिय चुनाव लड़ते है या अपना कोई मुकदमा बंद करवाना हो तब। ऐसे देश का भला क्या होगा जहा राजा ही चोर हो। ऐसे में अगर एक फ़र्जी मुठभेड़ हो रहा है तो कोई नही बात नही है। ऐसे तो होता ही रहेगा जब तक की ऐसे लोग है।
बात केवल एक फ़र्जी मुठभेड़ की नही है। हर तरफ़ भ्रष्टाचारी है। कहा-कहा बचेंगे कही न कही तो आपको भी टकराना ही पड़ेगा तो सोएये मत और आपनी बारी का इंतजार मत करे नही तो उस समय आपका साथ देने वाला कोई नही मिलेगा। जितने भी गंदे लोग है उनको निकलने लिय हम प्रण ले। नही तो बाद में बहुत लेट हो जाएगा। जागिये और बचा लीजिय अपने भारत माँ को।
जय हिंद जय भारत ..........अनुज..
Wednesday, 8 July 2009
.....asking Anuj Singh
hii i am asking to everybody.. who is responsible for curraption in public sector ? government or public . everyman face this problem but nobody can cry against this type problem. now question rise Why ? We are not aware or we are habitual. as far as i know, we have been known this is part of work. So we would be paid.
its not good sign for our Indian society and culture. what we can do ? we cant do any work without money. its so bad....
how is solve this problem........asking.........
its not good sign for our Indian society and culture. what we can do ? we cant do any work without money. its so bad....
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