Tuesday, 23 February 2010

मेरी सुन्दर प्रेमिका

वह मुझे बहुत ही शिद्धत से करती है प्यार,
मै चाहकर भी नही कर सकता इंकार !

उसकी दीवानगी है इस कदर मगरूर ,
मेरा  क्या, इस ज़माने का भी नही कसूर !

छीन कर ले जाएगी इस मगरूर ज़माने से ,
कोई नही बचा पायेगा उसके मुहब्बत के अफसाने से !

एक दिन वो मुझे अपने बाहों में सुलाएगी ,
फिर चाह कर भी किसी की याद नही आएगी !

मैंने नही देखा उसे, वो कैसी है,
लेकिन वो अच्छी होगी, चाहे वो जैसी है !

क्या कहूँ , उस खुशनुमा पल का मुझे भी है इंतजार ,
ना जाने कब तक करेगी मुझे बेक़रार !

जब आएगी मुझे लेने, जाना होगा जरुरी ,
फिर इस दुनिया से, कभी नही मिट पायेगी दुरी !

आप जानना चाहते है कौन है मेरी पत्नी की सौत ,
वह है मेरी सुन्दर प्रेमिका, मेरी मौत !

2 comments:

Randhir Singh Suman said...

उसकी दीवानगी है इस कदर मगरूर ,
मेरा क्या, इस ज़माने का भी नही कसूर .nice

Dr. Amar Singh said...

बहुत ही सुंदर रचना हैं, मौती ही वो प्रेमिका हैं जो अभी धोखा नहीं देती ,देर सबेर आती जरुर है..............