Sunday, 12 July 2009

जे. न. यु. में ऍम. फिल

बहुत ही टफ काम है। एक तो परेशान आदमी अपने मीडियम से रहता है ऊपर से गुरूजी का तेवर । बड़ी समस्या है। मै किसी व्यक्तिगत रूप से किसी टीचर को नही बोल रहा हु। लेकिन जितनी भी मेरे बैचमेट है सभी परेशान है। और होना भी चाहिए आख़िर आप जेनयु से एमफिल कर रहे है तो इतना तो परेशान होना हो पड़ेगा। मेरे हिसाब से समस्या ये नही है की हम कहा से आए है बल्कि समस्या इस जेनयु काहै जो इस तरह का माहौल दे देता है की हमलोग भू लजाते है की एमफिल भी करने आए है। अब एक दोस्त है मेरे जो की बहुत करीब है। मै नाम नही लूँगा वरना हो सकता है वो मानहानि की दावा भी कर दे। वो बेचारे पुरे तिन महिना आनंद लिय जेनयु के वातावरण का । अब जबकि १५ दिन बचा तब याद आया की मुझे कुछ काम भी है। अब इसमे आप बताये की किसका दोष है ? टीचर का या स्टुडेंट का या फ़िर जेनयु का। मुझे आज तक ये बात समझ में नही आई की लोग हर गलती का कोई न कोई बहाना क्यो निकल ही लेते है। वो ऐसा था इसलिय मै नही कर पाया। इस तरह के लोगो को हर काम दुसरे के सिरपर रख कर बचाना चाहते है। लेकिन इसका अंत क्या है ? उनको ख़ुद नही पता। मै ये सब लिख रहा हु इसका मतलब ये नही की मै ख़ुद इस समस्या से निजात पा लिया हु। लेकिन प्रयास जारी है। कब तक चलेगा ये कोई नही जनता। बहरहाल जेनयुका सुख तो कही नही मिलेगा भइया। ये मायावी नगरी है। इससे जो बच गया समझो वो कुछ कर गया। वरना ???????????????
अनुज सिंह

6 comments:

gudia said...

har baat ki keemat tay hai wo deni hongi

डिम्पल मल्होत्रा said...

hmm..log har galti ka bhana dhundh hi lete hai.....achhi post...

बेरोजगार said...

J.N.U. ka matalab "JANA NAHI USAME"
hota hai gyan pe jhoota ghamand karane wale yahi milenge

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

sahi bat hai.narayan narayan

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

रचना गौड़ ’भारती’ said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…मेरे ब्लोग पर आपका स्वागत है। बहुत अच्छा लिखा है बधाई।